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ग्लेशियर फटना नहीं था चमोली हादसे की वजह, वैज्ञानिकों ने बताया क्यों मची थी तबाही

देहरादून:  उत्तराखंड के चमोली में आई भीषण बाढ़ से बड़ी तबाही मचाई थी। इस हादसे में अबतक 71 लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है, जबकि 130 से ज्यादा अब भी लापता है। कहा जा रहा था कि, चमोली में ये भीषण बाढ़ ग्लेशियर फटने से आई है लेकिन वैज्ञानिक अब इसको लेकर नए दावे कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि, चमोली में आई अचानक बाढ़ की मुख्य वजह वादे पत्थरों का खिसकना है।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट के एक्सपर्ट्स का कहना है कि रोंती पर्वत की चोटियों के ठीक नीचे पत्थर खिसक गए जिससे बर्फ पिघलने शुरू हो गए। विज्ञान की भाषा में इसे 'रॉकस्लाइड' कहा जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक करीब 22 मिलियन क्यूबिक मीटर भारी पत्थर ग्लेशियर पर गिर गए. इसी के चलते अचानक पानी का भारी बहाव आगे की तरफ बढ़ने लगा।

 ICIMOD के रिसर्चर के मुताबिक इस पत्थर की चौड़ाई करीब 550 मीटर थी। ये समुद्र की सतह से करीब 5500 मीटर ऊपर था। आकार में बड़े और ऊंचाई पर होने के चलते इससे काफी ज्यादा मात्रा में एनर्जी पैदा हुई।  इससे पहले वैज्ञानिकों ने अलग-अलग तर्क दिए थे। पिछले दिनों ग्लेशियर के बारे में जानकारी रखने वाले वैज्ञानिकों की दो टीम जोशीमठ-तपोवन गई थी।

 विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तत्वावधान में देहरादून का वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, क्षेत्र में हिमनदों और भूकंपीय गतिविधियों सहित हिमालय के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करता है। इसने उत्तराखंड में 2013 की बाढ़ पर भी अध्ययन किया था जिसमें लगभग 5,000 लोग मारे गए थे।

 


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