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कांग्रेस के हाथ से गया एक और राज्य, क्या पुंडूचेरी में लगेगा राष्ट्रपति शासन?

पुंडूचेरी: कांग्रेस के हाथ से आज एक और राज्य चला गया। दक्षिण भारत के एकलौते केंद्र शासित प्रदेश पुंडूचेरी में भी कांग्रेस के हाथ से सत्ता चली गई है। दरअसल, कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद नारायणसामी की अगुवाई वाली कांग्रेस-डीएमके गठबंधन वाली सर्कार अल्पमत में आ गई थी। आज विधानसभा में सरकार बहुतमत साबित नहीं कर सकी। सोमवार को स्पीकर ने ऐलान किया कि सरकार के पास बहुमत नहीं है और सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सरकार गिरने के बाद नारायणसामी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस और डीएमके के एक-एक विधायकों ने रविवार को इस्तीफा दे दिया जबकि चार विधायक पहले ही साथ छोड़ चुके हैं। राज्य में कांग्रेस विधायकों के लगातार हो रहे इस्तीफे से वी नारायणसामी की अगुवाई वाली यूपीए सरकार अल्पमत में आ गई है। पुडुचेरी के उपराज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने विधानसभा में सोमवार शाम पांच बजे तक बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था, लेकिन उससे पहले ही सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाई।

 सदन में चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकों को पार्टी के प्रति वफादार होना चाहिए. साथ ही उन्होंने पूर्व राज्यपाल और केंद्र सरकार पर विपक्ष के साथ साठगांठ करने का आरोप लगाया। अब देखना होगा कि विपक्ष सरकार बनाता है या फिर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा।

गौरतलब है कि, पुडुचेरी में 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 15 सीटें आई थी, लेकिन पार्टी ने डीएमके और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाया था। पांच साल के बाद कांग्रेस के एक-एक कर विधायकों के इस्तीफे से पार्टी का सियासी समीकरण पूरी तरह गड़बड़ा गया। रविवार को कांग्रेस के के. लक्ष्मीनारायणन और डीएमके के वेंकटेशन के इस्तीफा दे देने से सत्तारूढ़ गठबंधन समर्थक विधायकों की संख्या घटकर 12 हो गई जबकि विपक्ष के पास 14 विधायक हैं।





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